जानिए इस साल भारत के ISRO के प्रमुख अंतरिक्ष अभियानों के बारे में

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के कई अभियान पिछले साल कोविड-19 की वजह से शुरू नहीं हो सके थे. इनमें गगनयान (Gaganyaan) का पहला और चंद्रयान-3 (Chandryaan-3) प्रमुख हैं. इस साल उनके साथ कई बहुप्रतीक्षित अभियायों पर काम शुरू हो सकेगा जिससे भारत का परचम पूरी दुनिया में लहराने की उम्मीद है.

गगनयान-1 में भारत के पहले यात्री अंतरिक्ष में पहुंचाने वाले अभियान के पहले चरण का परीक्षण होगा. वहीं चंद्रयान में भारतीय रोवर चंद्रमा की सतह पर चलेगा.

अंतरिक्ष (Space) में पहले भारतीय का पहुंचाने के लिए गगनयान (Gaganyaan) देश का पहला अभियान होगा. पांच वायुसेना (IAF) के पायलटों का चयन हो चुका है जिनमें से एक से तीन को अंतरिक्ष में जाने का मौका मिलेगा. गगनयान भारत का पहला ह्यूमन स्पेस फ्लाइट प्रोग्राम होगा. यह अभियान तीन चरणों में पूरा होगा. जिसके तीसरे चरण में भारतीय अंतरिक्ष यात्री सात दिनों के लिए अंतरिक्ष में रहेंगे.

गगनयान (Gaganyaan)

चंद्रयान 3 (Chandrayaan)-3 के जरिए चंद्रमा पर रोवर पहुंचाने की पूरी तैयारी में तभी से लगा हुआ था, लेकिन कोविड-19 की वजह से इसका प्रक्षेपण अब तक रुका हुआ है. इस साल की तीसरी तिमाही में ही इसरो इसे सफलता पूर्वक पहुंचाने की तैयारी में हैं.

चंद्रयान 3 (Chandrayaan)-3

इसरो (ISRO) का आदित्य L1 (Aditya L1) पहला भारतीय सोलर कोरोनाग्राफ स्पेसक्राफ्ट मिशन होगा जो सूर्य के कोरोना का अध्ययन करने के लिए इस साल में प्रक्षेपित किया जाएगा. सात उपकरणों से सुसज्जित आदित्य L1 सौर की सतह की गतिविधियों का विस्तार से अध्ययन करेगा. 

आदित्य L1 (Aditya L1)

इसरो (ISRO) का स्मॉल सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल (SSLV) का विकास हो चुका है और उसके पहले लॉन्च की तैयारियां भी हो रही है. इसे इसी साल की पहली तिमाही में लॉन्च किया जाएगा. एसएसएलवी पृथ्वी की निचली कक्षा में, पृथ्वी की सतह से 500 किलोमीटर दूर 500 किलोग्राम का वजन को प्रक्षेपित करने में सक्षम होगा. छोटे सैटेलाइट प्रक्षेपित करने में सक्षम एसएसएलवी की लागत पीएसएलवी की केवल 10 प्रतिशत ही बताई गई थी.

SSLV

इस समय इसरो (ISRO) के कार्यक्रमों में सबसे पहले रिमोट इमेजिंग सैटेलाइट (RISAT-1A) का प्रक्षेपण की तैयारी चल रही है. इसे अगले सप्ताह ही 6 जनवरी को ही प्रक्षेपित करने की योजना है. इस रिमोंट सेंसिंग सैटेलाइट (Remote sensing satellite) का उपोयग भूभागों का नक्शा बनाने और जमीन, महासागरों और सतही पानी के विश्लेषण के लिए किए जाएगा. यह जमीन में नमी की स्थिति का भी जायजा लेगा.

रिमोट इमेजिंग सैटेलाइट (RISAT-1A)

साल 2022 (Year 2022) से उम्मीद की जा रही है कि वह पिछले दो सालों के मुकाबले बहुत बेहतर साबित होगा और कोविड-19 महामारी का प्रकोप को पीछे छोड़ कर हम आर्थिक और अन्य गतिविधियों में तेजी से आगे बढ़ सकेंगे.

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