क्या है बिटकॉइन, कैसे काम करती है और कितनी सुरक्षित है, यहां मिलेगा जवाब

बिटकॉइन

दोस्तो, आज हम Bitcoin के बारे में जानेंगे कि यह होता क्या है और यह काम कैसे करता है।

क्या है बिटकॉइन

तो दोस्तो इंडिया में Rupees है, जो हमारी कंट्री में यूज होती है। यूके में Pound जो यूके में यूज होता है और US Dollar जो US में और बहुत सारी कंट्रीज में यूज होता है उसी तरह बिटकॉइन है वो करंसी है और ये भी कुछ कंट्रीज में यूज हो रहा है। अब इस इंडियन रुपी से हम ट्रांजैक्शन कर सकते हैं और हम इसे फिजिकली टच भी कर सकते लेकिन Bitcoin को हम टच नहीं कर सकते ये पूरी ऑनलाइन करंसी है और इसीलिए इसको क्रिप्टो करंसी कहा जाता है। यह फिजिकली एडजस्ट नहीं करता। यह सिर्फ डिजिटल फॉर्म में ही है यानी क्रिप्टो फॉर्म में।

जैसे पहले जमाने में लोग पास कंपनी के शेयर सर्टिफिकेट होते थे लेकिन अब हमारे पास मोबाइल ऐप में shares होते है तो उसी तरह अगर आपके पास एक लाख रुपए है तो आपको उस एक लाख रुपए के नोट रखने की जरूरत नहीं है। आप अपने मोबाइल ऐप में किसी बैंक में एक लाख रूपये रख सकते हो और मोबाइल ऐप से ट्रांजेक्शन कर सकते हो। तो इसी तरह की बिटकॉइन एक ऐसी करंसी है जो सिर्फ ऑनलाइन फॉर्म में है।

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बिटकॉइन कैसे काम करता है

अब दोस्तों मान लो अगर आपको एक लाख रुपए से कुछ डॉलर्स खरीदने है तो आपको एक डॉलर को खरीदने के लिए फिलहाल 75 रूपीस पे करना होगा। लेकिन एक बिटकॉइन को खरीदने के लिए आपको ऑलमोस्ट 40 लाख रुपये खर्च करना होगा। तो अब सवाल ये उठता है कि इस करंसी की वैल्यू इतनी ज्यादा बढी कैसे ?

तो इसके लिए हमें यह समझना होगा कि बिटकॉइन इनवेन्ट कैसे हुआ और यह काम कैसे करता है।

तो दोस्तो इमेजिन करो कि एक क्लास में 50 बच्चे है और बच्चों को टीचर ने एक मैथ्स का क्वेश्चन पूछा कि जो बच्चा सबसे पहले उसका जवाब देगा उसे एक रिवॉर्ड पॉइंट मिलेगा। जिस तरह जब आप कोई क्रेडिट कार्ड से शॉपिंग करते हो तो आपको पे बैक प्वाइंट्स मिलते या फ्लिपकार्ट से शॉपिंग करने पे आपको ऐसे सुपर coins मिलते है या कोई और जगह से शॉपिंग करने पर आपको उनके प्वाइंट्स मिलते होंगे जिसे जमा करने पर आप फ्यूचर में और शॉपिंग कर सकते हो।

तो उसी तरह जो लोग बिटक्वाइन के ट्रांजैक्शन को कंप्लीट करने के लिए उसकी मैथ की प्रॉब्लम सॉल्व करते जिनको माइनर्स कहते है तो उनको ऐसे रिवॉर्ड बिटकॉइन मिलता है। तो इसीलिए जिसने बिटकॉइन को डिजाइन किया उसने इसे इस तरह से डिजाइन किया है कि जब एक यूजर दूसरे यूजर को बिटकॉइन ट्रांसफर करता है तो यह पे हमें किसी थर्ड पार्टी की जरूरत होगी नहीं। क्योंकि जब भी हम बैंक से या पेटीएम से या कोई भी मोड से ऑनलाइन पैसा ट्रांसफर करते तो किसी न किसी को एक फी पे करनी पड़ती है उस पे को यूज करने के लिए लेकिन बिटकॉइन में किसी भी पार्टी को फी अपनी जेब से पे करनी पड़ती ही नहीं है।

क्योंकि माइनर्स को जो बिटकॉइन मिलते है वो बिटकॉइन के रिजर्व से मिलते है। तो जब भी कोई ट्रांजैक्शन होता है तो बिटकॉइन का एल्गोरिदम एक बहुत ही डिफिकल्ट क्वेश्चन क्रिएट करता है जिसके लिए माइनर्स को बड़े बड़े हाई टेक कंप्यूटर चाहिए तो जिस माइनर्स का कंप्यूटर पहले उस प्रॉब्लम को सॉल्व करेगा उसे रिवॉर्ड मिलेगा जो बिटकॉइन होता है।

बिटकॉइन का मूल्य

लेकिन दोस्तों, प्रॉब्लम ये है कि अगर ये रिवॉर्ड प्वाइंट कोई एक्सेप्ट ही नहीं करेगा तो ये माइनर्स ईतनी मेहनत और इतने इनवेस्टमेंट करेंगे ही क्यों? तो इसी लिए शुरूआत में यानी 2009 में यह बिटकॉइन कुछ भी काम का नही था। इसकी वैल्यू एक रुपए से भी कम थी और 2009 में एक बिटकॉइन यूजर ने 10 हजार बिटकॉइन से सिर्फ दो पिज्जा ऑर्डर किए थे। लेकिन अभी एक बिटकॉइन की वैल्यू 40 लाख के आसपास है।

क्या बिटकॉइन मूल्यवान है?

अब सवाल ये उठता है कि क्या ये बिटकॉइन असल में इतना वैल्यूबल है?

तो हम इसको समझने की कोशिश करते है। तो दोस्तो पैसों का मेन यूज होता है की आप इसके जरिए वैल्यू को एक्सचेंज या स्टोर कर सकते हैं। जैसे अगर कोई प्लंबर आपके घर में आके काम करके जाता है तो उसकी उस वैल्यूएबल सर्विस के लिए आप उसे कुछ पैसे देते हो। फिर वो प्लंबर उस पैसे से किसी और चीज को खरीद सकता है जो उसके लिए ज्यादा वैल्युएबल होगी और इसी तरह पैसों से हम अपनी वैल्यू ट्रांसफर करते है।

क्या बिटकॉइन सुरक्षित है

हम अगर इंसानो की हिस्ट्री रीड करोगे तो हम इस वैल्यू को अलग अलग तरीके से स्टोर और एक्सचेंज करते आ रहे है। जिसे एक जमाने में लोग गोल यूज़ करते थे, एक ज़माने में लोग नमक,गेहूं,शेल्स जैसी चीजें यूज करते थे। लेकिन जहां बात आती है पैसों की तो इसमें एक छोटी सी प्रॉब्लम है वो ये कि जब से हम इंसान इस दुनिया में रहते है तब से लेकर सौ साल पहले तक हम हमेशा किसी चीज़ पे भरोसा करते थे।

वैल्यू को एक्सचेंज करने के लिए और उसे स्टोर करने के लिए। जैसे हमने अभी डिस्कस किया इन सब चीजों पे। लेकिन रिसेंटली ये भरोसा लोग किसी चीज के बदले किसी एक पार्टी पे करने लगे यानी जो इस नोट को छापती है यानी हमारी गवर्मेंट।

इसीलिए हमें रिसेंटली कुछ प्रॉब्लम देखने मिल रहे हैं। क्योंकि अगर हम किसी एक पार्टी को नोट छापने का पावर दे रहे तो हम बेसिकली उसे सारा पावर दे रहे है। तो जब उस पावर को यूज करेगी तो हो सकता है कि वो उसे ईमानदारी से यूज़ ना करे। क्या किसी के फेवर में ज्यादा यूज करें या किसी के फेवर में थोड़ा कम। जैसे हम सबको पता है कि 2008 में एक बहुत बड़ा मार्केट क्रैश हुआ था। लेकिन इसके एक्चुअल रीजन बहुत ही कम लोगों को पता होगा।

इसका एक्चुअली रीज़न ये था कि यूएस के कुछ बैंक्स लालची हो गए थे और वो अनैतिकली होम लोन दे रहे थे ऐसे लोगो जो अपनी ईएमआई पे कर सकते ही नही थे। क्योंकि बैंक के टॉप एग्जिक्यूटिव्स को एक चीज़ समझ आ गई थी कि अगर हम ज्यादा प्रॉफिट कमाएंगे तो प्रॉफिट सिर्फ हमारा होगा लेकिन अगर बाय चांस हम कभी लॉस में जाते है और हमे बैंकरप्सी की नौबत आती है तो गवर्मेंट हमारी मदद करेगी ही तो इससे लॉस हमारा कुछ होगा ही नहीं।

इसीलिए जब मार्केट क्रैश हुआ तो यूएस के सेंट्रल बैंक ने ट्रिलियन डॉलर्स प्रिंट किए और बहुत सारी कंपनीज को डूबने से बचाया। तो वो कंपनी तो बच गई लेकिन नुकसान मिडिल क्लास लोगों का हो गया।

अब आप पूछोगे कि इसमें हम लोग नुकसान कैसे हुआ? तो दोस्तो जब भी गवर्मेंट में नोट प्रिंट करती है तो उसे इन्फ्लेशन बढ़ता है यानि महंगाई बढ़ती है और जो लोग सेविंग्स करते उनका परचेजिंग पावर कम होता है मतलब उनके हाथ में पैसे उतने ही रहेंगे लेकिन दिन पे दिन वो कम चीज़ों को खरीद पाएंगे। तो इसीलिए जब भी कोई पावर किसी एक एंटिटी के हाथ में आएगा तो करप्शन के चांसेज भी बढ़ेंगे और कुछ स्मार्ट लोग उसका फायदा उठा के निकल जाएंगे और मिडिल क्लास लोग उसका नुकसान भरते रह जाएंगे।

तो इसीलिए बिटकॉइन का सबसे बड़ा बेनिफिट ये है कि जो इसको सपोर्ट करते है वो इसे पीपल्स करंसी मानते है।इसको कोई भी गवर्मेंट और ज्यादा प्रिंट नहीं कर सकती नाही कंट्रोल कर सकती है। इसका जो भी प्राइस ऊपर नीचे हो रहे ये लोग खुद की डिमांड और सप्लाई से हो रहा है। क्योंकि इसकी एक लिमिट सेट की गई है कि ये बिटकॉइन 21 मिलियन ही रहेंगे।

तो गवर्मेंट सिर्फ और सिर्फ इसे बैन कर सकती है। लेकिन अब बहुत सारे लोग ऑलरेडी इसे यूज कर रहे ट्रांजैक्शन करने के लिए और अगर आप चाहो तो आप अपनी खुद की क्रिप्टो करेंसी बना सकते हो और उसको भी आप लेन देन के लिए यूज कर सकते हो अगर लोग उसे पेमेंट के लिए एक्सेप्ट करते है तो। लेकिन जब बिटकॉइन सक्सेसफुल हो चुका है और उसे कुछ कंट्रीज एक्सेप्ट भी कर रहे तो लोग किसी नई करंसी को यूज करेंगे क्यों?

इसीलिए बिटकॉइन की वैल्यू सबसे ज्यादा बड़ी है क्योंकि वो सबसे पहले करंसी थी लेकिन अगर कल को कोई दूसरी करंसी लोग ज्यादा डिमांड करने लगेंगे तो इसकी वैल्यू गिर सकती है। तो इसीलिए इनवेस्टमेंट रिस्की हो सकता है क्योंकि हमें नहीं पता कल इसकी वैल्यू क्या होगी। लेकिन ये तो टेक्नॉलजी ये बहुत ही बढ़िया है क्योंकि इससे सच में एक रियल प्रॉब्लम सॉल्व हो रही है।

तो इसीलिए अब इस टेक्नोलॉजी को देख सकते हैं कि ये काम कैसे करती है और इसे ट्रांजैक्शन कैसे होते है।

तो दोस्तों, अब हम ये समझते है कि आप बिटकॉइन बाय कैसे कर सकते हैं।

बिटकॉइन कैसे खरीदें?

तो इंडिया में 2018 में आरबीआई ने बिटकॉइन को बैन किया था लेकिन अभी उन्होंने बैन लिफ्ट कर दीया है और इसीलिए अब हमारे पास बहुत सारे क्रिप्टो एक्सचेंज और मोबाइल ऐप्स आ गए है जहा से हम बिटकॉइन और दूसरी क्रिप्टो करेंसी बाय कर सकते हैं।

इनमें से एक है Coinswitch Kuber। जो इंडिया के सबसे बड़े क्रिप्टो एक्सचेंज में से एक है। सिर्फ 11 महीनों में 60 लाख से ज्यादा लोगों ने इनके साथ रजिस्टर कर दिया है। इस ऐप से आप 75 से भी ज्यादा क्रिप्टो करेंसी खरीद सकते हो और इनका केवाईसी प्रोसेस काफी फ़ास्ट है। यहां पर आप 100 rs से भी शुरुआत कर सकते हैं।

इनकी सिंपल यूआई की वजह से बिटकॉइन खरीदना काफी आसान हो गया है। जैसे आप ऑनलाइन फ़ूड ऑर्डर करते हैं और आप अपने डिपॉजिट और विथड्रॉ भी इंस्टेंटली कर सकते हो। इनके साथ साइन अप करने से आपको 50 रुपये की बिटकॉइन फ्री में मिलेंगे और अगर आपको क्रिप्टो करेंसी के बारे में ज्यादा जानना है तो आप इनके यूट्यूब चैनल भी विजिट कर सकते हैं।

दोस्तो उम्मीद करता हूं कि आपको इस आर्टिकल से कुछ सीखने जरूर मिला होगा और अगर ये आर्टिकल पसन्द आया हो तो अपने फ्रेंड्स और फॅमिली के साथ जरूर शेयर करे।

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